उड़ जाऊँगा एक दिन ……

ये तुम्हारी बेरूखी ही है जो मुझे तेरे करीब खिंचती है और तुम्हें लगता है कि तुम मुझे इग्नोर किये जा रही हो ,कभी सोचता हूं शुक्रिया करू अपने करीब लाने के लिए पर मैं स्वार्थी नही हु ना तुम्हारी तरह जो सारी खिचड़ी अपने जहन में ही पकाये ,कभी निकलने दो अपने जज्बातों को ,खाली कर लो खुद को अपने अंदर से ,हो जाओ बेपरवाह की लोग क्या कहेंगे ,मिलने दो मेरे मन को अपनी रूह से ,कर लो थोडी कद्र मेरी इस प्रेम भावना को ,इससे ज्यादा मेरी अपेक्षा ही नही तुझसे ,और नही भी करोगी तो कोई बात नही क्योंकि मैं रिस्तो में व्यापार नही करता ,पर इतना जरूर है करोगी एक दिन कद्र मेरी भावनाओं का ,मुस्कुराओ गी पर अश्को के साथ ,खूब बाते करोगी मेरी तस्वीरों के साथ ,ढूढ़तें फ़िरोगी मुझे हर जगह लेकिन खाली हाथ ही आओगी क्योंकि मैं तो उडता हुआ प्रेम पंछी हूँ दाना नही डालोगी तो

उड़ जाऊँगा एक दिन तुम्हारे जीवन से रंगों की तरह

है नही यहाँ अब कोई आसान दिल का ………..

तुम्हारा मेरे पास होना चंद्रबिंदु सा प्रतीत होता है ,मेरे जीवन के मायने ही बदल देता है और तुम्हारा मुझसे यूँ दूर जाना मेरे होने पे अर्द्धविराम सा लगा देता है । जैसे लगता है सबकुछ थम सा गया हो ,मेरी साँसे भी मेरे अंदर जाने के लिए ऑक्सीजन मास्क का सहारा ढूंढ रही हो । हर चीज बेरंग ,बेढंग लग रही हो।

क्यू है ये कश्मकश चंद्रबिंदु और अर्द्धविराम के बीच ,इसे खोजने के लिए उतरा मैं कई दफा , रूहों की गहराईयो में ,पार किये कई सारे अश्को के गहरे समंदर लेकिन बस इतना ही खोज पाया इस कश्मकश को ———

है नही यहाँ अब कोई आसान दिल का ….✍️

बिखर-बिखर गया हर सिलसिला …..

अपने जेहन में बड़े ही क़रीने* से संजो रहा था, तुम्हारी हर बातों व कुछ अनकही मुलाकातों को ,पर नज़र कुछ यूँ लगी तुम पर , बिखर-बिखर गया हर सिलसिला अब तुम्हारे बाद …..

*- सलीके से, तरीके से